जब से भारत अपने सामरिक तेल भंडार को लम्बे समय के आपातलकाल के लिए भरने का फैसला लिया है तबसे रूस और सऊदी अरब के बिच तेल के दाम को लेकर जंग छिड़ी है, दोनों देशो की इस लड़ाई में भारत फंसता जा रहा है क्यों की भारत के सबंध दोनों देशो के साथ बहुत अच्छे है , लगातार दिनों से तेल के दामों में तेज़ी से गिरावट आ रही है जिससे रूस और सऊदी अरब दोनों देशो को भारी नुकसान हो रहा है और इस नुकसान से बचने का बस एक ही तरीका है की जितना ज्यादा हो सके उतना ज्यादा भारी मात्रा में तेल को बेचा जाये और क्यों की कोरोना वाइरस से चीन, यूरोप और बाकि के देशो की स्तिथि ख़राब है इसी लिए भारत ही एक ऐसा देश बचा है जिसे रूस और सऊदी अरब तेल को बेच सकते है, और तेल के दाम लगातार कम होते जा रहे है इसीलिए भारत ने भी किसी भी आपात्कालीन स्तिथि से बचने  के लिए बहुत भारी मात्रा में तेल को खरीद ने का निर्णल लिया है पर भारत रूस और सऊदी के बिच तेल की लड़ाई को लेकर असमंजस में पड़ गया है क्यों की भारत का रूस और सऊदी अरब दोनों देशो के साथ बहुत अच्छे संबंध है,

सामरिक तेल भंडार क्या होता है ?
कोई देश अपने यहाँ बड़े बड़े अंडरग्राउंड टनल बनता है जिसमे वह 1 साल से ज्यादा लम्बे समय तक का तेल भंडार रखता है जिससे युद्ध और आपात्कालीन समय के लिए देश में रखा जाता है या फिर अगर जिन देशो से हम तेल खरीदते है उन देशो से हमारे संबंध ख़राब होने लगे तब सामरिक तेल भंडार देश को काम आता है, आज की स्तिथि में भारत के पास केवल 1 से 2 महीनो तक का ही तेल भंडार है, इसी लिए भारत युद्ध और आपातकालीन स्तिथि से निपट ने के लिए भारी  मात्रा में तेल खरीदने वाला हे.

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